Friday, July 29, 2016

नामवर सिंह एक तटस्थ व्यक्तित्व ( तुम जियो हज़ारों साल )


इंदिरा गाँधी नेशनल सेंटर फॉर द आर्ट्स में आज ( 28 जुलाई 2016 ) नामवर जी का जन्मदिन मनाया गया। आज उन्होंने अपने जीवन के 90 वर्ष पूरे कर लिए हैं। उन्हें देख कर और सुन कर अनुमान नहीं लगा सकते कि वे नब्बे की वयस में हैं। शानदार भव्य व्यक्तित्व। न झुका हुआ न झूला हुआ। आज भी तना हुआ सा सीधा लंबा कद। अच्छे -अच्छे नौजवानों को मात देती हुई दुबली काया। चेहरे पर गरिमामय ज्ञान का तेज। मंच से घंटो बोलना कोई मुश्किल नहीं किन्तु कम शब्दों में बहुत कुछ कह देने का हुनर सिर्फ उनके पास ही हो सकता था।

मुझे जो सबसे मजेदार बात उनके व्यक्तित्व की लगी। वह थी उनकी तटस्थता। उनके बारे में अपने विचार रखते हुए मंच से कितना कुछ कहा जा रहा था। आदर से, श्रद्धा से, हास्य से , मज़ाक में। किस्सों का अंत नहीं था। वे ध्यान से सब कुछ सुन रहे थे किन्तु उनके चेहरे की भाव -भंगिमाओं में रत्ती मात्र भी फर्क नहीं आता था। सामान, निर्विकार भाव से सब कुछ देख -सुन रहे थे। 

आज सुनने की फुरसत किसी को नही किन्तु अपने बारे में बोलने-बताने को कितना कुछ होता है। किसी की जरा सी आलोचना कर दो, थोड़ा सा उनके हक़ में न बोलो फिर देखो रिश्तों का करवट बदलना। धैर्य खो चुके लोग अपने आप को सही साबित करने के लिए घंटो बहस कर देते हैं। इसलिए नामवर जी का धीर -ग़म्भीर सहज -सरल रूप देख कर मन आनंदित हो गया। 

बने रहें नामवर जी....दुवाएं 


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